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समुद्री तूफान के बीच लगातार 23 घंटे जहाज को चलाकर, अपने सभी क्रू मेंबर की जान बचाई!
"जवाहर नवोदय विद्यालय, गौरीगंज सुल्तानपुर के पूर्व छात्र हैं अभ्युदय प्रताप सिंह"
Dated : 2019-06-30
By एन एच डेस्क,लखनऊ
  देश में सेना के सैनिकों के शौर्य से हम सभी परिचित हैं, हमारे वायुयानों के पायलटों ने भी अभी तक ना जाने कितनी बार अपने जीवन को दांव पर लगा कर यात्रियों के जान की रक्षा की है ठीक ऐसे ही किस्से जहाजों से भी जुड़े हैं। चूंकि समुद्रों में मीडिया की पहुंच ज्यादा नहीं होती इसलिए कुछ किस्से हमसे छूट भी जाते हैं फिर भी आज हम आपको अवगत करा रहे हैं एक ऐसे रोमांचक और बहादुरी के किस्से से जो जहाज और उसके कप्तान की बहादुरी और ससमय हिम्मत के साथ फैसला लेने से जुड़ी है।
     इसी वर्ष दिनांक 12 जून को सी शेल नाम की जहाज जो मलेशिया से कुवैत के लिए रवाना हुई थी, दोपहर करीब 1 बजे तेज हवा के तूफान में फंस गई थी। उस समय वायुगति 130 किलोमीटर प्रति घण्टा थी और समुद्र की स्थिति यह थी कि लहरें तल 5 मीटर ऊपर उठ रही थीं। यह सब साइक्लोनिक वायु के कारण हो रहा था। इस समय मे यह फायर फाइटर जहाज अपने 14 सदस्यीय टीम के साथ मलेशिया से कुवैत जा रही थी और ईंधन की कमी होने के कारण द्वारका पोर्ट गुजरात में अंबुजा सीमेंट के निजी पोर्ट पर ईंधन लेने हेतु लगी थी। अचानक मौसम विभाग द्वारा जानकरी प्रदान की गई कि 130 किलोमीटर प्रति घण्टा के रफ्तार से साइक्लोन वायु पोर्ट की ओर आ रही है और समुद्र की लहरों की ऊंचाई वर्तमान में 5 मीटर है जिसके और बढ़ने की संभावना है। इसलिए इस जहाज को भारतीय तट गार्ड और पोर्ट ऑथोरिटी द्वारा आदेश दिया गया कि जहाज को शीघ्र ही कच्छ के गल्फ में ले जाया जाए। समुद्र की इस स्थिति को देखते हुए क्रू के 4 सदस्यों और 2 अधिकारियों ने आगे जाने से मना कर दिया। जिन्हें अपनी कर्तव्यों से भागने हेतु आगे की कार्यवाही के लिए गिरफ्तार किया गया। अब वर्तमान में जहाज में इंजिन भाग में 6 और नैविगेशन विभाग में जहाज के कप्तान और एक जूनियर अधिकारी शेष बचे थे। ऐसी स्थिति में इस तूफान में जहाज को 150 नॉटिकल मील ले जाना जान को हथेली पर रखकर एक बड़ी चुनौती स्वीकार करने जैसा था। चूंकि जहाज पोर्ट पर बंधा हुआ था और वायु की गति तेज होने से लगातार पोर्ट से टकरा रहा था जिससे पोर्ट और जहाज दोनों को नुकसान हो रहा था और स्थिति यह थी कि अब जहाज में छेद भी सकता था, जो जहाज के डूबने का कारण बन जाता और तूफान भी धीरे धीरे नजदीक आ रही थी जो सबसे बड़ी समस्या थी। ऐसी स्थिति में पोर्ट के अधिकारियों, भारतीय तट रक्षक अधिकारियों और मरीन विभाग के साथ जहाज के कप्तान अभ्युदय प्रताप सिंह ने आपातकालीन बैठक की और निर्णय लिया कि वे स्वयं इस चुनौती को स्वीकार करेंगे और उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इसे कच्छ के गल्फ तक पहुंचाऊंगा।  

      इस विकट परिस्थिति में सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश के इस बहादुर कप्तान ने 7 लोगों के जीवन और स्वयं को इस जहाज के साथ लेकर पूरी बहादुरी से वहां से प्रस्थान किया। हवा के बढ़ते दबाव और समुद्र की लहरों के बीच की समस्या को झेलते हुए बिना तूफान से डरे लगातार 23 घण्टे जहाज को चलाते हुए इस कप्तान में अंततः इस 8 सदस्यों के समूह को जहाज के साथ सुरक्षित कच्छ के गल्फ पर पहुंचा दिया। यहां पहुंच कर जहाज ट्रैफिक नियंत्रण से अनुमति लेकर बेदी पोर्ट के एंकर क्षेत्र पर जहाज का लंगर डाला गया। सभी को सुरक्षित पाकर जहाज के कप्तान अभ्युदय प्रताप सिंह ने सभी अपर अधिकारियों को अपने सुरक्षित होने की सूचना दी। 

      अभी जहाज के सभी सदस्य पुनर्जन्म होने जैसा महसूस कर रहे हैं और उन सभी ने तथा पोत के अन्य अधिकारियों ने कप्तान अभ्युदय प्रताप सिंह के बहादुरी की प्रशंसा की है। कप्तान अभ्युदय उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के हैं और प्रारम्भिक शिक्षा नवोदय विद्यालय गौरीगंज से पूरी करने के बाद इन्होंने पंजाब कॉलेज ऑफ मरीन ऑफिसर्स से ग्रहण की है। देश के नागरिकों को ऐसे कर्तव्यनिष्ठ और बहादुर कप्तानों पर गर्व होना चाहिए और संकट की स्थिति में कार्य छोड कर भागने वाले लोगों को इस से प्रेरणा लेनी चाहिए। कप्तान अभ्युदय के बहादुरी को हमारा सलाम है।

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